Skip to main content

HAPPY VALENTINE'S DAY....







एक अधूरी प्रेम कहानी
जिसमे राहुल और प्रिया एक दूसरे को चाहते तो है पर वक्त को कुछ और मंजूर था....

सुबह का वक्त था।हल्की धूप निकली थी।सब कुछ सामान्य रूप से चल रहा था।लोग अपने अपने काम मे लगे हुए थे।राहुल आज कुछ परेशान सा था।कुछ जल्दी में ही दिख रहा था।वैसे कोई घरेलू समस्या नही थी।थोड़ी देर बाद वह नहाने गया।नहाने के बाद घर पर ही थोड़ा बहुत खाना खाया।फिर नए कपड़े पहनकर तैयार हो गया।ऐसा लग रहा था कही कोई विशेष प्रोग्राम है जहाँ वो जाना चाहता है।हाँ,एक बात बता दूं राहुल एक मध्यम वर्ग का 20 वर्षीय छात्र है।                
          पिताजी खेत मे थे।   माँ ने पूछा- बेटा कहाँ जा रहे हों?राहुल बस इतना ही बोला माँ मैं थोड़ी देर में वापस आ जाऊंगा।यह कहकर राहुल घर से निकल गया।वहाँ से सीधे कॉलेज में पहुँचा।दोस्तों से मिला फिर इधर उधर घूमने लगा ।शायद किसी को ढूंढ रहा था।तभी अचानक से उसे प्रिया दिखी ।वह खुश हो गया ।प्रिया उसी के क्लासमेट थी।राहुल फिर वो गुलाब का फूल अपने बैग से निकाला जिसे वो सुबह से ही छुपा कर रखा था।तब मैं समझा आज वैलेंटाइन डे है।तभी प्रिया वहाँ से कही चली गयी शायद अपने सहेलियों  से मिलने।राहुल फिर से बेचैन हो गया ।उसे ढूंढने लगा आखिर गयी किधर।तभी प्रिया सड़क किनारे दुकान के तरफ जाते नजर आयी।राहुल वहाँ से तेज दौड़ते हुए भागा।पर किस्मत को कुछ और मंजूर था।राहुल जैसे ही सड़क पर आया ,तभी तेज रफ्तार गाड़ी  उसे रौंदते हुए निकल गयी।टक्कर की आवाज सुनकर प्रिया पलट कर देखी उसके पैरों में गुलाब पड़े थे और कुछ दूर पर खून से लथपथ शरीर ।पास जाकर देखा  तो राहुल था !वह सन्न रह गयी।उसे कुछ भी नही सूझ रहा था।आखिर ये क्या हो गया।क्योंकि उसे भी पता था राहुल उसे पसंद करता था और वैलेंटाइन डे को ही राहुल प्रपोज़ करने वाला था।इसलिए वह भी दुकान से कुछ गुलाब लेने गयी थी।राहुल के पास जाते ही प्रिया चिल्लाने लगी।बचाओ बचाओ कोई एम्बुलेंस को कॉल करो।   
                   पूरी तरह खून में सना राहुल दर्द से कराहते हुए इतना ही बोला-HAPPY VALENTINE DAY PRIYAaaaaaaa
और सदा सदा के लिए शांत हो गया।
    ना दिल लगा मेरे दोस्त,बड़ा ही दर्द मिलेगा                          प्यार में तुझे जख्म के सिवा कुछ न मिलेगा ।।   
                   यू ही बदनाम नही है ये इश्क़ की गलियां ,                       यू ही बदनाम नही है ये इश्क़ की गलियां                              जिंदगी रही तो फिर मिलेगा ।।




            #एक अधूरी प्रेम कहानी

Comments

Popular posts from this blog

संसद भवन की खास बातें Source:-दृष्टि आईएएस drishti Ias आप आजकल कभी संसद भवन के आसपास से गुजरें तो समझ आ जाएगा कि देश की नई संसद की इमारत के निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है। संसद भवन परिसर को बड़े-विशाल बोर्डों से घेर दिया गया है पर अंदर से बाहर आने वाली आवाजें बताती हैं कि नई संसद बनाई जा रही है। हालॉंकि पुराना संसद भवन बना रहेगा। उसके उपयोग को लेकर भी सरकार जल्दी फैसला लेगी। निश्चित रूप से भारतीय लोकतंत्र का सबसे अहम प्रतीक रहा है हरबर्ट बेकर द्वारा डिजाइन किया गया संसद भवन। बेकर ने अपने सीनियर और नई दिल्ली के चीफ टाउन प्लानर एडवर्ड लुटियंस के परामर्श से संसद भवन का डिजाइन तैयार किया था। इस निर्माण के वक्त दोनों में कई मुद्दों पर बहस होती रहती थी। बेकर इसके बड़े हॉल के ऊपर गुंबद बनवाना चाह रहे थे जबकि लुटियंस इसे गोलाकार रखने का पक्ष में थे। तब इसका नाम कौंसिल हाउस था। संसद भवन का निर्माण 1921-1927 के दौरान किया गया था। इसका उद्घाटन 18 जनवरी 1927 को हुआ था। संसद भवन वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है। इसकी तुलना विश्व के सर्वोत्तम संसद भवनों के साथ की जा सकती है। यह एक विशाल वृत्ताकार...

कर्म या भाग्य...

अक्सर आप कर्म और भाग्य की तुलना करते होंगे।कई सारे  सवाल आपके लिए उलझनें खड़ा कर देती होंगी।कर्म बड़ा है तो फिर भाग्य का क्या मतलब,अगर भाग्य बड़ा होता है तो फिर कर्म करने की क्या जरूरत।यह सिर्फ आप ही नही बल्कि पूरी दुनिया इसी विडंबना में उलझी है।चलिए हम आपको एक बहुत ही सरल और सार्थक कहानी के माध्यम से इसे समझाते है कि "कर्म बड़ा या भाग्य"।                                    किसी गाँव में एक गरीब आदमी था।उसके साथ उसकी पत्नी रहती थी।जैसे तैसे उनका गुजर -बसर चलता था। एक बार भाग्य ने कहा देखो मैं कैसे इसे अमीर बना देता हूं।तब भाग्य ने उसे एक हीरे का हार दिया ,यह सोचकर कि वह गरीब आदमी इसे बेचकर अमीर हो जाएगा।खुशी के मारे वह गरीब आदमी पागल सा हो गया।घर जाते ही हीरे की हार को दीवार पर टाँग दिया और नहाने चला गया।वापस देखा तो हीरे की हार गायब था।उसके पड़ोसिन ने वह हार चुरा लिया। भाग्य ने दुबारा उस व्यक्तति को एक सोने की अंगुठी दिया।वह अंगूठी को पहनकर नहाने चला गया और वह अंगूठी तालाब में गिर गई।दुखी मन से घर...

Army Running की तैयारी कैसे करें?

 मोटिवेशनल  क्या आप आर्मी जॉइन करना चाहते हैं   अगर सच में ज्वाइन  करना चाहते हैं तो अपने रनिंग के पुराने स्टाइल को बदल दीजिए  अब कुछ नया करते हैं जो आपको आर्मी भर्ती में एक्सीलेंट दिला  सके. आर्मी भर्ती के लिए रनिंग सबसे ज्यादा मायने रखता है.यह फर्स्ट स्टेज एग्जाम होता है जिसमें अगर आप रनिंग पास किए तो  ही इसके आगे के लिए आपको रखा जाएगा वरना ग्राउंड से ही  भगा दिया जाता है। आपमें से बहुत सारे लोग अब तक कई भर्तियां  देखें भी होंगे उन्हें अनुमान है कि कितनी भीड़ होती है और इस  भीड़ में रनिंग निकालना बहुत ही मुश्किल है पर इस मुश्किल  को हम बहुत ही आसान बनाने जा रहे हैं। जिंदगी की इस दौड़ में कठिन परिश्रम ही आपका एकमात्र सहारा हैं। Click Here सामान्यतः यह देखा जाता है कि हर किसी को आर्मी रनिंग की तैयारी में कुछ बेसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे :- दौड़ने का मन नही करता है समय से नींद नही खुलता दौड़ने के लिए कोई साथ मे नही रहता अच्छे ग्राउंड की कमी थोड़ी ही देर में सांस का फूलना दौड़ते समय सीने में दर्द होना कभी कभी पेट मे दर्द होना ...